Gps क्या है ? कैसे काम करता है?

Gps क्या है? कैसे काम करता है ? आज मोबाइल फोन से लेकर सड़कों पर चलने वाहनों में आपको GPS tracker दिखाई देता है! परंतु क्या कभी आपने सोचा है कि GPS क्या होता है, और कैसे GPS कार्य करता है? क्या सोच रहे हैं यदि नहीं! तो आज का यह लेख आपके लिए ही है

नमस्कार दोस्तों tagifind के एक और fresh आर्टिकल में आपका स्वागत है! दोस्तो मोबाइल में google मैप का इस्तेमाल कर किसी लोकेशन का पता करना हो, या फिर गाड़ी में travel करते हुए सही रास्ते पर निकलना हो। इसके लिए हम सभी को GPS की आवश्यकता पड़ती है ( Gps क्या है ? कैसे काम करता है )

इसलिए आज GPS टेक्नोलॉजी काफी advance हो चुकी है, जिसकी मदद से अनेक devices में हम GPS का इस्तेमाल देख सकते हैं। इसलिए एक user के लिए GPS के बारे में जानना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है, इसलिए इस लेख में आपको GPS क्या है? जीपीएस कैसे काम करता है? GPS के क्या-क्या फायदे हैं, यह सभी जानकारियां मिल जाएंगी।

तो क्या आप तैयार है GPS के बारे में जानने के लिए! तो आइए शुरुआत करते और सबसे पहले जानते हैं

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GPS ki full form kya hai ?

अंग्रेजी में GPS की full form “Global Positioning System” होती है।

जबकि इसका हिंदी रूपांतरण “भूमंडलीय स्थिति निर्धारण प्रणाली” होता है।

GPS kya hai?

Gps क्या है? कैसे काम करता है?

सरल शब्दों में GPS को समझें तो यह अंतरिक्ष पर आधारित एक सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम है! जिसके जरिए हमें मौसम के प्रत्येक पल की जानकारी हर लोकेशन एवं समय पर मिलती रहती है। ( Gps क्या है ? कैसे काम करता है )

दोस्तों यह System दुनिया की मिलिट्री, civil तथा कमर्शियल users को महत्वपूर्ण क्षमता उपलब्ध करता है। आपको बता दें GPS को US गवर्नमेंट द्वारा maintain किया जाता है। US डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस द्वारा 24 सैटेलाइट्स का एक नेटवर्क परिक्रमा के लिए भेजा गया! यही वजह है कि इन सेटेलाइटस को बेस्ट नेविगेशन सिस्टम कहा जाता है।

यह पूरी तरह फ्री है, अर्थात कोई भी इसे GPS रिसीवर के माध्यम से एक्सेस कर सकता है।

आपको बता दें शुरुआत में GPS को शुरू करने का उद्देश्य मिलिट्री में ट्रैकिंग हेतु इसका प्रयोग करना था! लेकिन 1980 के दशक में इस सिस्टम को मिलिट्री के साथ-साथ civilian use के लिए भी तैयार किया गया।

GPS का उपयोग बरसात हो या फिर कड़ी धूप किसी भी Wether कंडीशन में किया जा सकता है! तथा बिना थके, बिना रुके यह सिस्टम कार्य करता है। इसकी सुविधा लेने हेतु users से subscription के लिए भी कोई चार्ज नहीं लिया जाता।

दोस्तों उम्मीद अब आप समझ चुके होंगे कि GPS आखिर है क्या? अब हम GPS के उपयोग के बारे में जानेंगे! जिससे आप इसकी उपयोगिता को भलीभांति समझ पाएंगे। ( Gps क्या है ? कैसे काम करता है )

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GPS का उपयोग !

Locate positions

जी हां! आज हम सभी GPS के रूप में अपने डिवाइस में गूगल maps का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए GPS का एक सबसे मुख्य उपयोग है लोकेशन को ट्रैक करना।

मान लीजिए यदि आप किसी रोड trip पर है, और आपको सही रास्ता नहीं पता तो इस स्थिति में GPS आपको अपनी मंजिल तक पहुंचाने के लिए आपको best route या शार्टकट के साथ सही रास्ता दिखाने के साथ-साथ समय पर आपको सही जगह पहुंचाने में मदद करता है।

Prevent car theft

वर्तमान समय में सभी मॉडर्न Car’s GPS लैस होते हैं। और GPS की मदद से आप अपनी कार को चोरी होने से भी बचा सकते हैं। जी हां यदि आप अपने वाहन में किसी tracking डिवाइस को इंस्टॉल कर लेते हैं तो आप GPS के माध्यम से कार चोरी होने की स्थिति में अपनी Car का लोकेशन track कर पाएंगे।

आपको बता दें GPS टेक्नोलॉजी के इस उपयोग ने आज अनेक cars को ढूंढने में मदद की है।

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Flaying plain’s !

दोस्तों GPS का उपयोग अंतरिक्ष में aircraft भी अपने रूट का पता लगाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। plain के फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर में ट्रैकर को इंस्टॉल करना उपयुक्त है, ताकि फ्लाइट रिकॉर्डर के खो जाने पर उसे आसानी से ढूंढा जा सके।

तो दोस्तों इस तरह वर्तमान समय में GPS टेक्नोलॉजी का उपयोग अनेक क्षेत्रों में किया जाने लगा है, और आजकल तो चिकित्सक, साइंटिस्ट, किसान, सोल्जर, एथलीट्स अपने कार्यों में GPS तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं! तथा अपने कार्यों को अधिक productive तथा आसान कर रहे हैं।

देखा जाए इन 5 कार्यों के लिए GPS टेक्नोलॉजी का उपयोग सर्वाधिक होता है। जो निम्नलिखित है।

GPS का इस्तेमाल किन किन कार्यों के लिए किया जा सकता है?

  1. लोकेशन–वर्तमान पोजीशन को Determind (निर्धारित) करने के लिए।
  2. Navigation–एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए
  3. Tracking–मिलिट्री तथा अन्य स्थानों में किसी ऑब्जेक्ट को मॉनिटर करने या व्यक्तिगत मूवमेंट को ट्रैक करने लिए
  4. Mapping– विश्व में Map का निर्माण करने तथा दर्शाने के लिए
  5. Timing– पूरी विश्व में समय की सही सूचना देने के लिए।
  6. Space shuttle जोकि अपने आप को GPS के द्वारा navigate करती है।
  7. Tractor जो अपने आप GPS की मदद से हल चलता है।
  8. Airplane जो खुदसे landing करता है, GPS की मदद से।
  9. Football कोच, खिलाडियो को GPS की मदद से ट्रैक करता है।
  10. एक hiker अगर अपना रास्ता भूल जाता है, तो GPS की मदद से, safely वापिस आ सकता है.
  11. Animals को ट्रैक करने के लिए GPS का उपयोग होता है।
  12. Military में ( मिसाइल्स, bombs में और aircraft में )

तो GPS क्या है? यह समझने के बाद अब हम जानेंगे कि आखिर यह तकनीक किस तरीके से कार्य करती है!

GPS कैसे काम करता है?

Gps क्या है? कैसे काम करता है?

GPS लगभग 24 सैटेलाइट्स का एक नेटवर्क है! दोस्तों यह सेटेलाइटस earth से लगभग 20000 किलोमीटर दूर orbit में घूम रही है।

दोस्तों जीपीएस का इस्तेमाल अपने मोबाइल, car या अन्य devices में आज हम कर पा रहे हैं, परंतु यहां आपका जानना जरूरी है कि GPS का accurate इस्तेमाल करने के लिए कम से कम चार सेटेलाइटस का दिखाई देना आवश्यक है।

तथा इनमें से प्रत्येक सेटेलाइट नियमित समय अंतराल पर वर्तमान पोजीशन एवं टाइम की जानकारी के लिए signals को Transmit करती रहती है।

दोस्तों आपके डिवाइस में लगा GPS इन signals को receive करता है, तथा यह सिग्नल एक स्पीड पर इधर से उधर travel करते रहते हैं! और जब GPS रिसीवर इन सिग्नल्स को प्राप्त करता है तो किसी message को उस रिसीवर तक पहुंचने में कितना समय लगेगा इसके आधार पर ही कैलकुलेशन की जाती है कि यह सेटेलाइट कितनी दूर है।

तथा जब यह confirm हो जाता है की आपके GPS रिसीवर से मिनिमम 3 सेटेलाइटस की दूरी कितनी है, तो आ GPS डिवाइस आसानी से पता लगा सकते हैं कि आपकी वर्तमान लोकेशन कहां पर है!

इसलिए संक्षेप में समझे तो GPS रिसीवर को जितनी अधिक सेटेलाइटस visible होंगी! वह उतनी accurate लोकेशन का पता लगा पाएगा।

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GPS Ke Prakar

अब जानते है GPS कितने प्रकार के होते है और इनके प्रकारों के आधार पर यह क्या काम करते है:

Assistant GPS

इस GPS का प्रयोग जब GPS Positioning System शुरू होता है तो उसकी प्रोसेस की स्पीड को बढ़ाने के लिए करते है तथा जब सिग्नल लॉक होता है तब Assistant GPS Position को लॉक करने के लिए रिसीवर की मदद करता है। इसे Web Based Internet Server कहा जाता है। जो पहले से सैटेलाइट की जानकारी को स्टोर करके रखता है।

Simultaneous-GPS

इससे मोबाइल को GPS और Voice Data एक ही समय में मिलते है। नेटवर्क Carrier के लिए सैटेलाइट पर आधारित रिपोर्टिंग को इम्प्रूव करने के लिए यह तरीका अपनाया जाता है। इससे ही नेटवर्क प्रोवाइडर, Location Service Provide करते है।

GPS Locking

हमें जब किसी चीज का बिल्कुल सही पता लगाना होता है तब GPS Locking का प्रयोग किया जाता है। इससे हम किसी भी डिवाइस की बिल्कुल सही लोकेशन पता कर सकते है। GPS Lock, ट्रैकर की स्पीड पर निर्भर करता है। अगर कोई ड्राइविंग कर रहा है तो उसकी स्पीड कम हो जाती है तथा उसकी लोकेशन का पता लगाने में समय लगेगा। GPS Locking 3 प्रकार की होती है जिनके बारे में आपको हम नीचे बता रहे है।

Hot Start

अगर GPS को आपकी Last लोकेशन पता होती है तथा साथ ही UTC Time भी पता होता है तो यह उस सैटेलाइट की मदद लेता है और उस जानकारी के अनुसार नई लोकेशन का पता लगाता है। यह प्रक्रिया आपकी लोकेशन के ऊपर भी निर्भर होती है। यदि GPS Receiver Last Position के नज़दीक होता है तो ट्रैकिंग की स्पीड तेज हो जाती है।

Warm Start

इसमें GPS इस जानकारी के साथ ही पहले वाली जानकारी को भी स्टोर करके रखता है। इस प्रकार से रिसीवर पूरे डाटा को रिसेट कर देता है और नई लोकेशन का पता करने के लिए सैटेलाइट सिग्नल्स का इस्तेमाल करता है। यह थोड़ा स्लो होता है लेकिन कुछ ही समय में ट्रैकिंग कर लेता है।

Cold Start

इसमें कोई भी जानकारी पहले से नहीं होती है। यह अपनी ट्रैकिंग शुरू से ही स्टार्ट करता है इसलिए इसमें लोकेशन को ट्रेस करने में समय ज्यादा लग जाता है।

Satellites Navstar Launched

No.SatelliteLaunched on
1NAVSTAR 122-02-1978
2NAVSTAR 213-05-1978
3NAVSTAR 307-10-1978
4NAVSTAR 411-12-1978
5NAVSTAR 509-02-1980
6NAVSTAR 626-04-1980
7NAVSTAR 719-12-1981
8NAVSTAR 814-07-1983
9NAVSTAR 913-06-1984
10NAVSTAR 1008-09-1985
11NAVSTAR 1109-10-1985

जैसे अमेरिका की Navstar system है, वैसे ही कुछ देश हे, जिनकी अपनी खुद की navigation सिस्टम है. जिसमे भारत भी शामिल है।

भारत  की navigation system का नाम है: Indian Regional Navigation Satellite System  (IRNSS) है

CountryNavigation system
IndiaIRNSS – Indian Regional Navigation Satellite System
RussiaGlonass
chinaBei-dou 2
Europe unionGALILEO
USANAVSTAR
JapanQuasi-Zenith Satellite System

​ इन सभी में से भारत और चीन की satellites सिर्फ अपने देश के एरिया को ही कवर करती है।

GPS Calculation

वैसे तो यह calculation थोड़ी जटिल होती है !लेकिन हमने आपको आसान भाषा में समजने की कोशिश की है।GPS के रेडियो signal light की स्पीड से travel करते है। और gps रिसीवर उस satellite से कितना दूर है वह पता लगाता है।

और यह पता लगाने के लिए जीपीएस रिसीवर को radio  सिग्नल receive करने  में कितना टाइम लगा इससे distance calculation  किया जा सकता है। जैसे की हमें पता है, की

distance = velocity × time

यहां पर velocity = light की speed  होगी।

मतलब की  48866458 m/s

इसमें special relativity को ध्यान में रखते हुए calculation  करनी पड़ती है।

Conclusion :-

तो दोस्तों आज के इस लेख में बस इतना ही! आज आपने जाना कि GPS क्या है? यह कैसे काम करता है! उम्मीद आपको GPS से संबंधित उपयोगी जानकारी आपको इस लेख में मिली होगी। यदि आपका कोई और भी सवाल है तो कमेंट box पूछ सकते हैं, साथ ही इस जानकारी को सोशल मीडिया जैसे ही फेसबुक, whatsapp पर भी जरूर शेयर करें! ताकि उन्हें भी जीपीएस की जानकारी मिल सके! thanks for visiting tagifind.com

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